अध्याय २०: नेत्रा के विवाह प्रस्ताव का निर्णायक क्षण
नेत्रा के घर का माहौल एक रहस्यमय शांति से भरपूर था, मानो वक़्त धीमा हो गया हो। देवीप्रसाद और प्रकाश, शेखर के साथ वहाँ पहुंचे थे, जैसा पहले से तय हुआ था। घर में एक गंभीर और सुसंस्कृत आभा व्याप्त थी। प्रकाश का व्यक्तित्व इतना सरल और सौम्य था कि जब वे पहली बार घर में कदम रखे, तो एक सुकून की लहर सबके दिलों में दौड़ गई। उनके पहनावे और सलीके में एक पुरातन मर्यादा झलक रही थी, मानो वो एक पुरानी परंपरा के वाहक हों, लेकिन उनके चेहरे पर आधुनिकता की रेखाएं भी थी, जो सबको मंत्रमुग्ध कर रही थीं।
दिव्यक्षी, जो नेत्रा की माँ चंदा के रूप में वहां उपस्थित थीं, ने प्रकाश के व्यक्तित्व को गहरे से परखा। चंदा के दिल में हल्की सी आशंका थी, क्योंकि उनकी बेटी का भविष्य अब इस व्यक्ति के हाथों में जाने वाला था। लेकिन जब उन्होंने प्रकाश को सम्मान और विनम्रता से सबका अभिवादन करते देखा, तो उनकी सारी शंकाएं धीरे-धीरे पिघलने लगीं। चंदा को पहली बार ऐसा महसूस हुआ कि प्रकाश ही वह व्यक्ति है, जो नेत्रा के जीवन में स्थिरता और स्नेह ला सकेगा।
गांव के वरिष्ठ जन, जो परिवार के फैसलों पर हमेशा अपनी राय देते थे, वहाँ चुपचाप प्रकाश का आकलन कर रहे थे। वे बहुत गहन दृष्टि से देख रहे थे कि क्या प्रकाश वह सही व्यक्ति होगा, जो नेत्रा के जीवन को सुखमय बना सके। उनकी आंखों में एक धीरज था, वे बिना बोले बहुत कुछ कह रहे थे। और जब प्रकाश ने अपनी गहन वाणी में विवाह के प्रति अपने दृष्टिकोण को समझाया, तो उनकी गंभीरता और परिपक्वता ने सभी का दिल जीत लिया। शेखर और चंदा, जो अब तक थोड़ी चिंता में थे, अब निश्चिंत हो गए।
नेत्रा, जो अपने कमरे के भीतर बैठी सब कुछ सुन रही थी, उसके दिल की धड़कनें तेज हो गई थीं। विवाह उसके जीवन का सबसे बड़ा फैसला था, और वह इस बात को लेकर संजीदा थी कि एक अजनबी के साथ कैसे जीवन बिताया जा सकता है। उसकी समझ में यह सवाल बार-बार आ रहा था कि क्या वह सही फैसला कर रही है? एक बार फिर उसने खिड़की से बाहर झांका और देखा कि प्रकाश सभी से विनम्रता से बातें कर रहे थे। उनकी सरलता और सौम्यता ने उसके मन में एक अलग सी जगह बना ली थी।
चंदा ने कमरे में प्रवेश किया और धीमे स्वर में कहा, "नेत्रा, बेटी, क्या तुमने उसे देखा? क्या तुम्हें वह ठीक लगा?" नेत्रा ने जवाब में धीरे से सिर हिलाया। उसकी माँ की आंखों में अनुभव और स्नेह था। उन्होंने समझाया, "बेटी, विवाह केवल दो लोगों का मिलन नहीं होता, यह दो परिवारों का भी संगम होता है। लेकिन यह निर्णय तुम्हारा होगा। हम तुम्हें कभी भी मजबूर नहीं करेंगे।" इस बात ने नेत्रा को थोड़ी राहत दी, क्योंकि उसे महसूस हुआ कि उसका परिवार उसके साथ है।
नेत्रा ने खिड़की से प्रकाश की ओर दोबारा देखा। इस बार उसकी नजरों में एक अलग ही चमक थी। प्रकाश की आंखों में एक गहराई थी, जो उसे यह महसूस करा रही थी कि उसके अंदर वो सभी गुण हैं जो वह अपने जीवनसाथी में चाहती थी। यह विचार नेत्रा के मन में तेजी से दौड़ने लगे, और वह हल्की सी मुस्कुराई। उसके दिल में अब एक नई आशा का जन्म हो रहा था।
खाने के बाद, जब सभी मेहमान वापस लौट रहे थे, तो घर में एक फिर से शांति फैल गई थी। दिव्यक्षी और वज्राक्ष, नेत्रा के निर्णय का इंतजार कर रहे थे। वज्राक्ष ने गंभीरता से पूछा, "नेत्रा, तुम क्या सोचती हो? क्या यह रिश्ता तुम्हारे लिए सही है?" नेत्रा ने धीमे स्वर में कहा, "आप मेरे माता-पिता हैं। मुझे आप पर पूरा विश्वास है। जो भी आप तय करेंगे, मुझे वह स्वीकार होगा।"
लेकिन नेत्रा का निर्णय केवल उसका नहीं था। उसके नाग परिवार, जो सैकड़ों सर्पों से भरा था, उसकी रक्षा और देखभाल करने वाले भाई-बहन भी इस विवाह को लेकर उत्साहित थे। वे अपने-अपने अदृश्य रूप में प्रकाश की हर गतिविधि पर नजर रख रहे थे। एक-एक कर उन्होंने प्रकाश को परखा, उसके व्यक्तित्व के हर पहलू का गहन निरीक्षण किया। सप्ताहों के बाद, उन सभी ने दिव्यक्षी से कहा, "प्रकाश एक अद्भुत व्यक्ति है। उसने सभी कसौटियों पर खरा उतरा है।"
आखिरकार, सभी ने मिलकर नेत्रा और प्रकाश के विवाह की पुष्टि कर दी। यह निर्णय केवल परिवार के लिए नहीं, बल्कि नेत्रा के नाग परिवार के लिए भी एक महत्वपूर्ण पल था। नेत्रा को यह एहसास हुआ कि उसका भविष्य अब एक नई दिशा में जा रहा है, लेकिन वह कहीं न कहीं अपने नाग परिवार से बिछड़ने का दुख भी महसूस कर रही थी।
जब नेत्रा ने अपनी माँ से कहा कि वह अपने सर्प भाई-बहनों को बहुत याद करेगी, तो उसकी मासूमियत में एक हल्की सी चिंता थी। उसने धीमे स्वर में पूछा, "माँ, क्या यह संभव है कि वे सभी मेरे ससुराल में भी आकर रहें?" दिव्यक्षी ने हँसते हुए कहा, "बेटी, हमारा यह संबंध केवल इस जन्म का नहीं है। हम तुम्हारे साथ हर जन्म में रहेंगे।"
इसके बाद, दिव्यक्षी ने नेत्रा को नागलोक की एक विशेष मूर्ति भेंट की, जो उसे हमेशा यह याद दिलाती रहेगी कि उसका नाग परिवार हमेशा उसके साथ है। यह उपहार न केवल नेत्रा के जीवन में एक सुरक्षा की भावना लेकर आया, बल्कि उसे यह एहसास भी दिलाया कि वह कभी अकेली नहीं है, चाहे उसका जीवन किसी भी दिशा में क्यों न जाए।



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