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अध्याय २२: नाग की छाया: एक टूटे परिवार की दास्तान

सुबह का सूरज धीरे-धीरे आसमान में चढ़ रहा था, और नेत्रा की दिनचर्या शुरू हो चुकी थी। हमेशा की तरह, वो जल्दी उठी और सीधा पूजा के कमरे की ओर बढ़ गई। उसके सामने शिवलिंग था, जो उसे उसकी माँ नयनतारा ने दिया था। यह शिवलिंग साधारण नहीं था; इसके चारों ओर पाँच फनों वाला नाग अपने पूरे फन फैलाए हुए था, मानो उसकी सुरक्षा कर रहा हो। नेत्रा उस दृश्य में तल्लीन हो चुकी थी, मानो संसार की हर चीज़ से अनजान हो। यह अद्भुत था, एक दिव्य शक्ति का आभास। लेकिन इसके साथ ही इसमें एक गहरा डरावना पहलू भी था — नाग का फन, जो किसी भी क्षण कुछ भी कर सकता था। नेत्रा की पूजा में ध्यानमग्नता अचानक उस समय टूट गई, जब उसकी सास, दमिनी, कमरे में आईं। दमिनी की आँखें शिवलिंग पर टिक गईं और उनके चेहरे पर हल्की सी चिंता उभर आई। उन्होंने बिना किसी देरी के पूछा, "ये अजीब सा शिवलिंग कहाँ से आया है? यह बहुत सुंदर है, लेकिन ये नाग! ये नाग बहुत डरावना है, बेटा। तुमने सामान्य शिवलिंग की जगह इसे क्यों चुना? या फिर किसी अन्य देवी-देवता की पूजा क्यों नहीं करती?" उनकी आवाज़ में एक संदेह और डर दोनों साफ झलक रहे थे। नेत्रा ने दमिनी की...

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